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Friday, September 13, 2013

हिंदी का खून हो गया

आज की ताज़ा खबर हिंदी का खून हो गया .... 

अरे फैज़ तुने कुछ सुना कल समाज के एक सभ्य  वर्ग ने हिंदी का गला घोंट कर मार डाला हजारों की भीड़ ने इस हादसे को देखा पर किसी न कुछ भी कहना  उचित नहीं समझा अलबत वो  तालियाँ बजा  रहे थे उक्त घटना के दौरान मै तो सहमा से एक कोने में बैठा रह गया । कुछ कह भी नहीं पाया वहां .........वहां हर  तरफ हिंदी के प्रकांड विद्वान भी बैठे थे पर माता अंग्रेजी के आगे उनकी बोलती बंद थी 

जी हाँ मेरा कैमरा सत्य कह रहा है आज हर  तरफ रोज़ हिंदी का खून हो रहा है पर कोई इस और ध्यान नहीं दे रहा है । आप मेरी इस बात पर अजीब सा मुह बनाएँगे और कहेंगे फैज़ साहब आप का दिमाग तो ठीक है आज कल अंग्रेजी का युग  है कहाँ आप हिंदी की बात कर रहे है , मै  पूछता हूँ ऐसा कब तक चलता रहेगा जब  कोई व्यक्ति या छात्र कहीं नौकरी के  लिए जाता है तो उससे यह पूछा  जाता है की आप की अंग्रेजी कितनी अच्छी  है आती है या नहीं , क्यों कोई हिंदी के लिए ऐसे प्रश्न नहीं पूछता ? आखिर हिंदी से यह सौतेला व्यहवार कब तक करता रहेगा हमारा प्यारा सभ्य  समाज , अभी भी वक़्त है संभल जाइये वरना कुछ नहीं हो सकता इस देश का  खैर मेरा कैमरा तो ऐसे ही बोलता रहता है पर आप ज़रूर बोलिए .. हिन्दी के लिए  बोलिए .....

Saturday, March 23, 2013

" श्री आदिकाल से निरंतर अनशन जी महाराज "

दोस्तों होली का मौका है और कुछ न कुछ चटपटा  हर तरफ दिखाई दे रहा है । कल शाम  मेरा कैमरा भी निकल गया  कुछ चटपटा लेने और ले आया  " श्री आदिकाल से निरंतर अनशन जी महाराज " और उनके भक्तों का साक्षातकार बहुत है मस्ती का समां बन गया था वहां ....आइये कुछ अंश उस साक्षातकार के यहाँ पेश कर रहा हूँ शायद आप को पसंद आये .......

नमस्कार दोस्तों आज हमारे साथ विराजमान है  " श्री आदिकाल से निरंतर अनशन जी महाराज " साथ ही मौजूद है  उनके भक्त सर्वप्रथम अन्ना अनशन हजारे , केजरीवाल उर्फ़ अनशन बाबा , श्रीमती मेनका पेटा अनशन , और इन सभी के साथ है पैसा अनशन उर्फ़ नेता जी ...

हमारा पहला सवाल "श्री आदिकाल से निरंतर अनशन जी महाराज " से महराज ये बताये की आप का नाम अनशन क्यों पड़ा और आप आदिकाल से सतत क्रिया में कैसे पड़े हुए है क्या आप को  नुकसान नहीं पहुचता ? 

श्री आदिकाल से निरंतर अनशन जी महाराज  - देखिये कैमरा बाबु हमारे उद्भव के वक़्त आप तो थे नहीं उस वक़्त अनशन में सच्चाई होती थी हम ऐसे ही ५ -५- महीने टाट पर पाँव  पसारे  पड़े रहते थे । अब न वो भक्त रह गए हमारे न वो मज़ा । लोग हमारे नाम पर बड़ी बड़ी सरकारें हिला  देते है । रामलीला मैदान में उतनी भीड़ राम जी को देखने को नहीं हुई जितनी मुझे देखने को हुई थी । 

तो महराज आप को तो खुश होना चाहिए .....

अन्ना अनशन हजारे जी आप बताइए कैसा लगता है आप को अनशन जी महराज का साथ ?

अन्ना अनशन हजारे- देखिये मै  इनका बहुत बड़ा भक्त हूँ और इनकी शक्ति किसी नुक्लीयेर बम से कम नहीं है जहाँ ये सच्चे मन से आते है वहां की सर्कार परेशां हो जाती है धन्य हो अनशन जी महराज ...

अन्ना अनशन हजारे जी हमने देखा है की आप के मंच पर बहुत लोग अनशन महराज की शरण में थे किन्तु कुछ मतभेद भी थे  क्या ? कुछ लोग मंच के पीछे जा कर जूस का लाभ उठा रहे थे क्या 

अन्ना अनशन हजारे - अरे नहीं नहीं यह सारा सर गलत है ऐसा कुछ नहीं हुआ ये सब तो आप लोगों की झूटी रिपोर्ट है ।  

श्री आदिकाल से निरंतर अनशन जी महाराज - नहीं कैमरा बाबु आप सही कह रहे है ये सभी लोग बारी बारी  से जा के पीछे जूस पीते थे और हमारा नाम ख़राब कर रहे थे पब्लिक  को पता चलता तो उसी झंडे के डंडे से इनकी पिटाई कर देते वही इन सब की, बड़े भक्त बने फिरते है हमारे । 

अनशन बाबा केजरीवाल जी आप बताये आप को अनशन पर बैठने की बचपन से आदत है या सिर्फ ऐसे ही मस्ती करने के लिए बैठ जाते है आप ?

केजरीवाल उर्फ़ अनशन बाबा - देखिये अनशन जी महराज मेरी रग रग  में बसे है मई उनका परम भक्त हु बचपन में भी  जब माँ मुझे सामान नहीं देती थी तो मै  अनशन पर बैठ जाता था और अब तो मई अनशन पर बैठने का आदि हो गया हूँ क्योंकि मई आम आदमी पार्टी हो गया हूँ  और एक खास बात आप अपने यहाँ छापियेगा मत अनशन की वजह से कोई न कोई अख़बार मुझे एक कोने में रोज़ जगह तो देता है न । तो बोलो कौन न जाएगा भला अनशन बाबा की शरद में । 
 मेनका पेटा  अनशन जी आप नित्य तो नहीं हाँ पर अनशन करती है जानवरों के लिए क्या इसकी कोई खास वजह  ?

मेनका पेटा अनशन - देखिये हमारे घर में कई सरे जानवर थे जब मै  शादी कर के आई जिसमे कुछ इटालियन थे तो मैंने वहां से अनशन पर बैठने की शुरुआत की अनशन महराज  की वजह से मई आज जिंदा हूँ।   

और आप का क्या विचार रहता है अनशन के बारे में पैसा अनशन जी आप तो पैसा मिला और अनशन पर बैठ गए जूस फल तो नित्य प्रतिदिन मिलाता ही होगा आप को साथ ही रत में दूध मलाई भी 

श्री आदिकाल से निरंतर अनशन जी महाराज - कैमरा बाबु इसे पकड़ो मै  बताता हु इसने तो मेरा नाम ही डूबा दिया है पिछले ५०  साल में मै  मजाक बन गया हु  इसको तो मई अपने साथ ले जाऊँगा ताकि इसकी साडी प्रक्रिया बंद हो जाए पकड़ो इसे 

भागो भागो ... अरे रुकिए तो आप लोग ..........अरे नहीं भागो यहाँ से ....

लीजिये ये लोग यहाँ से भाग गए .. और जानते है आज सुबह  से क्या हो रहा है मेरे घर के सामने .... कैमरे को गिरफ्तार करो  अनशन  पैसा नेता अनशन  का २ दिवसीय अनशन 

बुरा न मनो होली है ...........



Friday, October 26, 2012

टोपी बाज़

लीजिए एक नया मंच तैयार हो रह है  जो देश की गरीब जनता को टोपी पहनायेगा , कल तक यही लोग देश की असहाय जनता के दुःख दर्द का साथी बनने  का एलान  कर रहे  थे आज उसे ही छलने निकल पड़े है , देश की ज़रुरत के लिए कहते उन्हें पार्टी बनानी पड़ रही है । सही कहा था मेरे कैमरे ने की जब सविधान सभा के बाद आज तक किसी सभा ने बिना किसी घोटाले के  काम नही किया तो ये भ्रष्टाचार  के दादा लोग क्या करेंगे जो इसे ख़त्म करने की बात करते हैं । जब जनाब केजरीवाल साहब ने साल भर में तीन टोपियाँ बदल डाली तो यदि उन्हें देश की बागडोर दे दी हमारी भेड़  सरीखी जनता ने तो वो उसे 5 साल में कितनी टोपियाँ पहन्येंगे .... अभी भी वक़्त है  भेड़  की खाल  में छुपे भेडिये  को पहचानिए .............. 

Saturday, October 20, 2012

हम भस्मासुर

आप सभी को नवरात्री की हार्दिक बधाई पर आज जो  मैंने देखा उससे मेरा  मन विचलित हो  गया , सुबह के  अख़बार पर  नज़र पड़ने  के बाद कुछ अच्छा नहीं लग रहा  है ,  एक तरफ नवरात्र में लोग माँ  दुर्गा के  शीश नवा  रहे है वही दुसरे माँ दुर्गा के रूप नारी को दहेज़ की बलिवेदी   पर चढ़ा रहे है   और उन्हें इस की ज़रा भी शर्म नहीं है ...चरों तरफ जहाँ महिला सुरक्षा की बात  की जा रही है माँ दुर्गा की आरती चल रही है उस देश में महिलाओं का यह  हाल है , अब तो हद  ही हो  गयी है । 

लोग बेटियों को पढ़ना नहीं चाहते पर माँ दुर्गा से  आशीर्वाद की उम्मीद है , माँ के गर्भ में  ही लड़की की  हत्या करने का घिनौना पाप कर रहे  है पर माँ दुर्गा से संतान प्राप्ति के इच्छुक है ।  क्या यह  सही है ,जिस माँ की हम पूजा करते है  क्या वो  स्त्री नहीं है फिर बेटियों से यह सौतेला व्यहवार  क्यों  अभी भी वक़्त है वरना वह दिन दूर नहीं जब हम भस्मासुर की तरह स्वयं का नाश कर लेंगे । 

 इस नवरात्री  संकल्प करे  की हम स्त्री जाती को सामान दर्जा देंगे ...   

Saturday, September 8, 2012

शिक्षा दिवस या छुट्टी

आज शिक्षा  दिवस है , चरों तरफ शिक्षा के प्रचार प्रसार की बातें हो रही है । इन्ही बैटन के बीच मै  आज कुछ काम से अपने विश्वविद्यालय पहुंचा , वहां के प्रसिद्द हॉट स्पोट पर मैंने जो मंज़र देखा उसे देख  विचलित हो गया जहाँ एक तरफ विश्वविद्यालय के छात्र वहां अपनी पढाई के बारे में बातें कर रहे थे वही चाय की एक दुकान पर एक 12 साल का लड़का उन छात्रों के बीच चाय पहुचाने    में लगा हुआ था . किसी की नज़र उस के ऊपर नहीं गयी शायद या फिर किसी  को यही याद  नहीं था की आज शिक्षा  दिवस है हाँ कुछ  छात्र ये ज़रूर कह रहे थे आज तो विश्वविद्यालय में छुट्टी है । क्या यही सही है की हम शिक्षा  दिवस को छुट्टी मनाए । राहुल जैसे बच्चे क्या  ऐसे ही हमें चाय परोसते रहेंगे .....!!!!! 

आइये कुछ करें वरना वक़्त निकल जाएगा हमारे हाँथ से ......  

Saturday, August 25, 2012

"असलम के अब्बू मरे या बचे "

यार कैमरे लगता है मेरा असलम अपने अब्बू से मिलने दुबई  नहि जा पाएगा और उसकी यह दशा मुझसे नहीं देखि जाती । बेचारे ने कितने ही चक्कर लगाये है पासपोर्ट ऑफिस बनारस के पर वहां से एक ही जवाब आता है की जाओ किसी प्रशासनिक अधिकारी से यह फार्म भरवा के लाओ साथ में उसकी सार्विस पहचान पत्र की जीरोक्स भी ले के आना वरना तुम्हारा अर्जेंट पासपोर्ट नहीं बन पाएगा , अरे यार फैज़ अगर ऐसा नहीं हुआ तो वो बेसहारा तो अपने अब्बू से मिलने नहीं जा पाएगा और वक़्त पर नहीं पहुंचा तो उसके अब्बू को कुछ भी हो सकता है , हाँ अब तो ऊपर  वाला ही कुछ कर सकता है .....

जी हाँ यह सच है जब से पासपोर्ट ऑफिस की प्राइवेट ब्रांच खुली है शहर में तब से यदि  आप को अर्जेंट  पासपोर्ट बनवाना है तो आप को किसी प्रशासनिक अधिकारी के सार्विस कार्ड का फोटो कॉपी भी मांगी जा रही है । जब पता लगाया गया तो पता चला की पहले  भी यह नियम था  पर इतनी सख्ती नहीं थी पर अब है । ऐसी सख्ती किस काम की कौन ऐसा प्रशासनिक अधिकारी है जो अपने सर्विस कार्ड की फोटो कॉपी देने को तैयार होगा .. उसे इससे कोई मतलब नहीं की "असलम के अब्बू मरे या बचे " 

आप सभी से निवेदन है इस व्यवस्था का कोई इलाज ढूंढें  वरना स्थिती  गंभीर हो जाएगी 

Wednesday, August 22, 2012

"ज़ार-ज़ार रोई शहनाई"

यार फैज़ देखा कैसे समाज भूल जाता है लोगों को ........अरे नही समाज नही भूला ये तो सरकार है जो भूल गई  ,वरना सभी सामजिक लोग पहुचे थे वहां । ..........

आप सोच रहे होंगे की मै किस के बारे में बात कर रहा हूँमै भारत के उस नायब रत्न की बात कर रहा हूँ जिसकी भरपाई सदियों तक कोई नही कर सकता ....भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान साहब की जिनकी कल पाँचवी पुण्यतिथि थी । ...जब मै वहां पहुँचा तो वहां उनके चाहने वालों का तांता लगा हुआ थासभी नम आंखों से उन्हें श्रधा सुमन अर्पित कर रहे थे ।  । उनके छोटे पुत्र जामिन हुसैन उनकी कब्र के बगल में बैठे उनकी पसंदीदा मातमी धुन "मारा गया है तीर से बच्चा रबाब का " और परदेस में बहेन को चले हो किस पे छोड़ के "बजा रहे थेजिसे वो हर साल मोहरम के महीने में मुहर्रम को बजाते थे जिसे सुन ने के लिए दुनिया के कोने कोने से लोग आते थेलेकिन आज उनकी पुण्यतिथि पर शहर का सांस्कृतिक जगत  भूल गया ....क्या एक भारत रत्न की यही इज्ज़त है हमारे देश में

जब खान साहब का देहावसान हुआ था तब तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह ने यह घूश्ना की थी की खान साहब की कब्र की जगह पर एक भव्य मकबरा बनवाया जाएगा तथा लखनऊ में एक संगीत एकादमी तथा लाख रूपये के संगीत अवार्ड का एलान किया थापर आज तक नाटो मकबरा ही बना और नाही कुछ और ...इस बात से उनके चाहने वालों में काफ़ी रोष दिखा ।आज एक बार फिर वही लोग सत्ता में है पर कोई भी उनका प्रतिनिधि यहाँ नहीं मैजूद था 

बात की तह तक जाने के लिए मेरे कैमरे ने बात की उनके परिवार वालों से ....जिनका कहना था की सरकार तो हमें भूल सी गई है जब "अब्बा " जिंदा थे तो सब आता था लेकिन अब तो कोई पूछता भी नही । आज सभी प्रशासनिक अधिकारी  शहर मेयर मोहले  जी और  विधायक अजय राय जी आए समाज सेवी दयाशंकर मिश्र दयालू जी भी पहुचे ।

हमने बात की उनके परिवार से जुड़े सैयेद मुनाजिर हुसैन "मंजू" से जिनके यहाँ से उठने वाले मुहर्रम के जुलूस में "उस्ताद" शहनाई पर आँसू का नजराना पेश करते ............"मेरे हिसाब से मामले को बहुत ज़्यादा खींचा जा रहा है जो मकबरे के लिए ज़मीन का विवाद है ,प्रशासन की ये जो उदासीनता है ,खान साहब के सम्मान के प्रति ठीक नही ....

आप ही बताइए की क्या हमारे देश के नायाब हीरों की यही कदर होगी उनके मरने के बादअगर ऐसा ही चलता रहेगा तो कल को कोई गांधी जी और जवाहर लाल नेहरू जी को भी नही पुछेगा । आज शहनाई रोई है कल पूरा हिन्दुस्तान रोयेगा ..............

Tuesday, August 14, 2012

15 अगस्त का दर्द

यार फैज़ कल 15 अगस्त है , आज़ादी का पर्व मुझे एक स्टोरी करनी है 15 अगस्त के बारे में कुछ आइडिया दे कहाँ जाओं की मुझे जनता से बात करने  का मौका मिले । कैमरे तू  ऐसा कर सुबह उठ कर झंडा रोहण के बाद पार्क ,शापिंग माल , या फिर गंगा के उस पर चले जाना बहुत से लोग मिल जाएँगे वहां 15 अगस्त पर बात करने वाले , पर एक कडवी सच्चाई भी जान  ले की वो सब वहां सिर्फ मस्ती  के मूड में गए होंगे उनके लिए 15 अगस्त सिर्फ एक छुट्टी का दिन है न की आज़ादी का पर्व जिसे हमारे पूर्वजों ने बड़ी मुश्किल से पाया है जिसकी वजह से आज हम सर उठा के जीते है । सही कहा फैज़ कल मैंने जब कालोनी के लड़कों से पुछा तो वो बोले कैमरा भैया 15 अगस्त को हमारी छुट्टी है हम फिल्म देखने जाएँगे . किसी ने कहा की मम्मी पापा पिकनिक पर चलेंगे हम सब को ले कर ..मैंने  जब पूछा की हम  15 अगस्त क्यों मानते है तो सिर्फ  एक बच्चा ही बता पाया की उस दिन हमें आज़ादी मिली थी और जानते हो वो बच्चा बगल के रमेश भाई के यहाँ वेल्डिंग का काम करता है पढता नहीं है । आखिर कैसे जगेगा देश जब हमारी आने वाली पीढ़ी देश का इतना अहेम दिन भूल जाएगी तो क्या होगा । अगर हम आज नहीं जगे तो कल क्या होगा आइये एक संकल्प ले की कल हम 15 अगस्त के बारे में लोगों को जागरूक भी करना है वरना यहाँ दिन महज़ छुट्टी का दिन हो कर रह जाएगा ।

Friday, August 3, 2012

एक और राजनितिक पार्टी का निर्माण

रालेगढ़ सिद्धि में आज जश्न का माहौल है .क्योंकि कल ही बाबा अन्ना हजारे ने यह एलान किया है की हम एक राजनितिक पार्टी का गठन जो देश के हित में होगी करने जा रहे है ,पिछले 60 सालों में जो पिछली पार्टियाँ  नहीं कर पाई वह हम कर दिखेंगे  पर इस जश्न का एक कारन और  भी है की अब गाँव के प्रधान बात कर रहे  है की हम भी कही न कही से विधायकी का टिकट मिल जाएगा अब हमारे भी दिन ठाठ से गुजरेंगे ,कोई कह रहा है की हमें पार्टी का सचिव  बना दे बस अन्ना बाबा देखना फिर पार्टी नयी उचाईयों को छुएगी ,सिर्फ अन्ना जी के घर ही क्यों ,अरविन्द जी  कुमार विश्वास जी , किरण बेदी जी सभी के करीबी इस आस में जश्न मन रहे है की अब हमें पार्टी में उचा कद मिलेगा और  हम भी अन्य विधायकों की तरह ठाठ से घूमेंगे । गलती इन लोगों की नहीं है गलती अन्ना जी की है जो पुराने लोगों से सीख नहीं ले रहे है जब  60 साल में किसी पार्टी ने देश के हलात नहीं सुधारे तो कोई और क्या सुधार  पायेगा आप के अन्दर वह काबिलियत बिला -शक  है पर महोदय एक कहावत है "अकेला चना भाड नहीं फोड़ता" अभी  भी वक़्त है ऐसा कोई फैसला न लीजिये जिसकी वजह से आप को ही नहीं   देश को भी पछताना पड़े  .....................................  



Wednesday, March 7, 2012

होली मुबारक हो ! ! ! ! ! !


होली के इस पवन पर्व पर ब्लॉग जगत के सभी अल्हड और मदमस्त ब्लोगियों को मेरी और मेरे कैमरे की तरफ से होली की हार्दिक शुभकामनाये | आप सभी से मेरा अनुरोध है की इस होली पर सभी गिले शिकवे भूला कर अपने प्रतिद्वान्धियों को भी गले लगाये , अपने पड़ोसियों के साथ ऐसा कुछ करें की होली का रंग फीका पड़ जाए | आप सभ्गी प्राकृतिक गुलाला का प्रयोग करे ताकि किसी भी प्रकार की परेशानी इस उल्लास के पर्व पर आप को उठानी पड़े | इस पर्व को भारतीय अखंडता और एकता के साथ मनाये किसी पर अनावश्यक रंग डाले यदि वह मना कर रहा हो | घर में होली का पर्व भारतीय मर्यादा का पालन करते हुए खेले | ............
और आखिर में इस बनारसी की तरफ से आप सभी को भंग की ठंडी हवा और ठंडे की गरमी के साथ होली की बहुत बहुत शुभकामनाये ...होली है ! ! ! ! ! ! !

Wednesday, January 11, 2012

कुशवाहा या "कुल खावा"


जैसे -जैसे चुनाव नज़दीक आ रहे है दलबदलू की एक नयी जमात बनती जा रही है उसी की एक जीती

जागती तस्वीर है बाबु सिंह कुशवाहा जो जैसे ही भाजपा में आये उसके चुनावी मुद्दे को खाने लगे या यू

कहे की जब उन्हें बसपा ने निकला था तब वो साफ सुथरे नहीं थे पर जैसे ही भाजपा ने उन्हें अपने सर

माथे चढ़ाया सीबीआई ने अगले ही दिन शुरू कर दी जाँच ,अब आने लगा भाजपा के बड़े बड़े कमंडल

धारी तिलक बाबा लोगों को पसीना, अरे यह क्या हुआ ? अब तो सबका हाजमा ख़राब हो गया सभी

अपच के शिकार हो गए कोई कह रहा है की कांग्रेस की साजिश है कोई कह रहा है की ये प्रदेश की पार्टी

के लोगों की गलती है ,यहाँ तक की बड़ी बड़ी नेत्रियों ने कह दिया हमसे तो पूछा ही नहीं अब यह मुद्दा

हम कोर कमिटी की बैठक में उठाएँगे लीजिये फिर वही बच्चों वाली बात कर दी आपने अरे भाई आप

की पार्टियों की जो नीतिया था उसे तो कुशवाहा ताऊ खा गए .जैसे भ्रष्टाचारियों को टिकट नहीं देंगे साफ

सुथरी सरकार बनाएँगे आदि . ताऊ तो कुल खा गए अब का फायद उनके ऊपर इतना बखेड़ा खड़ा कर के

आप कोर कमिटी में जाएँगे ,जगह जगह पुतला जलाएँगे नारेबाजी करेंगे इससे मान किसका बढेगा

कुशवाहा ताऊ का और किसका तो चाचा भलाई इसमें ही है की अब जो हो रहा है होने दो वरना ताऊ तो

खा ही रहे है सब आप सब खुद भी खाने लगोगे .

Tuesday, October 25, 2011

" प्रकाश उत्सव दीपावली पर भारत माँ को न भूले "



आप सभी को प्रकाश के पर्व दीपावली की हार्दिक शुभकामनाए ...आप सभी को इस प्रकाश पर्व पर माँ लक्ष्मी अपने आशीर्वाद से नवाज़े आप के घर खुशियाँ ही खुशियाँ आये ....पर इन खुशियों में भारत माँ के पीड़ा को भी समझे पटाखों से होने वाले प्रदूषण से बचे ...कम से कम पटाखों से दीपावली बनाए क्योंकि ये प्रकाश का पर्व है अंधकार का नहीं कितने ही लोग इस बारूद की गंध से स्नोफिलिया और साँस सम्बन्धी बिमारियों का शिकार होते है .....और तो और कितने ही लोग सावधानी न बरतने की वजह से पटाखों की चपेट में आजाते है और उनकी खुशियाँ अंधेरो में खो जाती है ....आप सभी से गुज़ारिश है की पटाखों को कम से कम तथा सावधानी से इस्तेमाल कर प्रदुषण और दुर्घटना दोनों से बचे ..क्योंकि यह प्रकाश उत्सव है नाकि अंधकार उत्सव ....एक बार फिर आप सभी को मेरी और मेरे कैमरे की तरफ से हैप्पी दीपावली .......

Friday, October 14, 2011

प्रशांत भूषण का है कश्मीर क्या ???

अरे कैमरे कहाँ से तुझे ये मिल गया तू गया था क्या जहाँ प्रशांत भूषण ने कश्मीर की आग में पेट्रोल डालने का प्रयास किया था ....हाँ फैज़ गया था ले देख ले और दिखा दे सबको की क्या कहा था अन्ना के इस सिपाही ने .....देश की अखंडता को तोड़ने का पूरा प्रयास किया था इसने .............




अन्ना हजारे जी ने तो पल्ला झड लिया प्रशांत भूषण से पर सोचिये आप सब की जब अन्ना के बगल में बैठा व्यक्ति ये सोच सकता है तो बाकि लोग इनकी रह पर क्या सोचेंगे ..स्थिति बड़ी ही विकटहै ...अब चिंतन का वक़्त है की कौन हमें छलने की कोशिश कर रहा है ...कही ये भगवान के वेश में शैतान तो नहीं ????


Saturday, October 8, 2011

" लाठी और गाली के बीच भरत मिलाप "

वाह भाई वह क्या बात है ..हमें तो पता ही नहीं चलता की भक्तों को उनकी भक्ति की कीमत कैसे चुकानी पड़ती है ..हमारे महेश भाई तो बेचारे फस ही गए ......पर फैज़ वो तो पत्रकार है न तो फिर उन्हें ये सब क्यों सहना पड़ा ...अरे कैमरे क्या बडबडा रहा है ....अरे फैज़ महेश भाई है न अपने भदोही वाले उन्ही का सन्देश आया है...उनके यहाँ कल भारत मिलाप गलियों और लाठियों के बीच संपन्न हुआ .ले तो भी पढ़ ले उन्ही की ज़ुबानी .....

कल हमारे यहाँ का एतिहासिक 100वां भरतमिलाप था और मै भी पत्रकारिता से दूर होकर एक आम आदमी की तरह उमड़े जनसैलाब में शामिल हो गया ! लोग धक्का मुक्की करते रहे तभी वहां पुलिस की गाडी आ धमकी ! पुलिस के जवान रोड को खाली करने लगे रोड पर मै भी खड़ा था कोतवाल साहब ने तो पहचान लिया जो मेरी इज्जत कुछ देर तक बची रही उन्होंने मेरा हालचाल पूछा और चलते बने ! तभी राम रथ वहां पंहुचा और पुलिस के जवान रोड ख़ाली कराने के लिए लाठियाने लगे और दो चार गन्दी गालियाँ भी सुनने को मिली ! मुझे अपने ऊपर आश्चर्य हुआ की मैंने कैसे सब कुछ सह लिया पर क्या करूँ भगवन राम को देखने में मै बहुत मग्न था और पुलिस वालों के पास मुझे पहचानने का टाइम भी नहीं था ! इसी तरह लाठियों और गालियों का प्रयोग कर पुलिस प्रशासन ने मेले को संम्पन्न कराया !

देखा फैज़ आस्था पर गली और लाठी भरी पड़ती नज़र आई वहां ....सही है कैमरे पर क्या करेगे हम और वो सब तरफ " माया का डंडा" ऐसा चल रहा है की वर्दी धरी भी सन्किया गए है उन बेचारो को भी तो अपने कर्तव्य का निर्वाह करना है पर अच्छा है की भारत मिलाप सकुशल संपन्न हो गया ......और आस्था के सैलाब में व्यक्ति सब कुछ भूल कर भक्तिमय हो जाता है , चाहे वो पत्रकार हो या कोई हो ....महेश जी आप को बधाई इन गलियों और लाठियों से बचने की ........

Friday, October 7, 2011

भारतीय बुलंदी का "आकाश"



शाबाश हिन्दुस्तानियों तुमने तो कमल कर दिया आज हमें "आकाश" की बुलंदियों पर पंहुचा दिया अब हम भी गर्व से कहेंगे की हमने वो बनाया जो किसी ने बनाने का नहीं सोचा ..........



जी हाँ हम बात कर रहे है भारत के ही नहीं विश्व के सबसे सस्ते टैबलेट कंप्यूटर आकाश की जिस पर लिखा है मेड इन इंडिया ..यह एक ऐसी बात है जिसके लिए कुछ भी कहा जाये कम है ......आज मेरा कैमरा भी काफी खुश है की वो विदेश में बना है पर रहता यहाँ हिंदुस्तान में है ....उसी ने मुझे इस टैबलेट कंप्यूटर की खूबियों के बारे में बताया टैबलेट आकाश को भारत के शीर्ष आईटी कॉलेजों ने विकसित किया है और इसका निर्माण विदेशी कंपनी डाटाविंड ने ये बीड़ा उठाया , बाद में भी ये कम्प्यूटर भारत में ही एसेंबल किया जाएगा.इस टचस्क्रीन टैबलेट के फ़ीचर की बात करे तो इसमें २५६ मेगबाइट रैम है, दो जीबी का एसडी मेमरी कार्ड है, 32 गीगाबाइट की मेमरी विस्तार क्षमता है और दो यूएसबी पोर्ट हैं। यह गूगल के एंड्रॉयड प्लेटफॉर्म पर काम करेगा । इसमें आप पेन ड्राइव,वेबकैम, डोंगल लगा सकते हैं और वाईफ़ाई कनेक्टिविटी का विकल्प भी है।


ये भारतीय छात्रों के लिए ही तैयार किया गया है ताकि वो कम लगत में अच्छी पढाई पढ़ सके ,मानव संसाधन मंत्रालय अपने सस्ते टैबलेट को लाखों विद्यार्थियों को मुहैया करवाना चाहता है ताकि वे शैक्षणिक सामग्री डाउनलोड कर सकें और आईटी क्षेत्र से जुड़ सकें ।
अभी ये टैबलेट ट्रायल दौर में है। इसे कुछ छात्रों और ट्रेनरों में बाँटा गया है जो इसका इस्तेमाल करेंगे। 45 दिनों बाद इसके प्रदर्शन पर रिपोर्ट सौंपी जाएगी , उस अनुसार आकाश में बदलाव किया जाएगा ।
सरकार का लक्ष्य स्कूली बच्चों के लिए एक करोड़ टैबलेट उपलब्ध करवाना है ।
ज़ाहिर है आने वाले दिनों में सबकी निगाहें आकाश पर रहेंगी कि क्या ये वाकई ई-सशक्तिकरण में ऊँचाइयाँ छू पाएगा या नहीं ।

Wednesday, October 5, 2011

"सविधान का हनन "

यार फैज़ एक कम कर अपनी गाड़ी पर एक लाल बत्ती और हूटर लगा ले ....मै तो अवाक् रह गया उसके इस बचकाना हरकत से ...अरे कैमरे भंग खाई है क्या तुने ...जनता है न लाल बत्ती कौन लगा सकता है अपनी गाड़ी पर ...अरे जनता हों पर कल बहराइच में क्या हुआ तुने देखा था न ...आप को बता दो कल मै बहराइचके दौरे पर था मेरा कैमरा हमेशा की तरह मेरे कंधे पर चढ़ा बैठा था ...तभी सामने से एक लाल बत्ती लगी गाड़ी आती हुई दिखी ....आगे लिखा था संसद प्रतिनिधि ...मेरा कैमरा लपक के आगे आ गया और लगा फोटो खीचने तभी उसमे से एक महिला बहार आई और और सभी का अभी वादन करने लगी ....मैंने आस पास के लोगों से जानकारी की तो पता चला की ये संसद जी की पत्नी है और चुनाव प्रचार पर निकली है ..........


बस तभी से इसका दिमाग ख़राब है ...और वहां के परिवहन अधिकारी बड़ी बड़ी बात कर रहे थे की यह गलत है और दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी पर ऐसा कुछ नहीं होगा ....जब माननीयों को यह सोविधा है की वो सविधान का हनन अपनी मर्ज़ी से करते रहे तो गरीब तबके और मिडिल क्लास फैमली को क्यों सविधान के दायरे में रहना पड़ता ही। क्या सिर्फ नियम कानून गरीबों के लिए ही ही ...या फिर सविधान में यह ही की कोई भी व्यक्ति लाला बत्ती लगी गाड़ी से घूम सकता ही और घूम ही नहीं चुनाव प्रचार कर सकता ही ........सोचिये और बताइए आखिर ऐसा कब तक होता रहेगा हमारा हनन ..............

Friday, August 19, 2011

धोका "अन्ना" का

क्या अन्ना जी आप चल पड़े उसी रह पर ...सरकार ने आप को २ सितम्बर तक का टाइम दिया था ...आप बहार आये और अपना भ्रष्टाचारी रूप दिखा दिया .....धोका दिया है आप ने ये कह के आम जनता को की अब हम तब तक यहाँ से नहीं उठेंगे जब तक की जन लोकपाल लागू नहीं किया जाता .....मै जन लोकपाल के खिलाफ नहीं हो मै आप के खिलाफ हूँ यह कैसा छल का सत्याग्रह या अनशन है मुझे जवाब देगा कोई ...आम जनता भले ही भारत की भेड़ चाल चलने वाली हो..पर इतिहास गवाह है यहाँ की जनता को अगर छाला गया है तो इसका परिणाम बहुत ख़राब आये है आप अंग्रेजों का हाल देख चुके है ..........गाँधी बनना चाहते है तो उनके आदर्शो को फिर से पढ़े अन्ना जी .........

Wednesday, April 27, 2011

"२६ जून की दुविधा "

बताइए न सर मै क्या करू किस की परीक्षा दू ...मै तो परेशां हो गया हो । सरकार कहती है की हर छात्र सभी प्रतियोगी परीक्षा को दे सकता है अगर वो उसके नियमो का पालन करता है तो पर ये कैसी परीक्षा प्रणाली है की एक ही दिन में ४-४ प्रतियोगी परीक्षा हो रही है । ........


ये उस छात्र की दुविधा है जिसने इस वर्ष UGC NET , SSC , CBSE TET और UPPCS की प्रतियोगी परीक्षा का आवेदन किया है अब वह क्या करे इनमे से कौन सी परीक्षा दे या छोड़े । सब एक ही दिन यानि २६ जून २०११ दिन रविवार को हो रही है । ....


भारत सरकार क्या कर रही है , क्या वो इस तरह छात्रो के भविष्य से खिलवाड़ तो नहीं कर रही । आखिर क्यों ऐसा हुआ क्या इन प्रतियोगी परीक्षाओ की समितियों मे कोई भ्रष्ट समझौता हुआ है क्या ? आखिर इस तरह छात्रो के भविष्य से क्यों खिलवाड़ हो रहा है .........


मुझे जवाब चाहिए ...??????


Saturday, April 9, 2011

"एक और भ्रष्टाचार की कमेटी "

क्या बात है फैज़ आज तुम बहुत खुश लग रहे हो कुछ खास वजह इसकी बोलो ? हाँ कैमरे आज भारतीय लोक की विजय हुई है , आन्ना हजारे जी जो की पिछले दिनों अनशन पर बैठे थे भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी मांग भारत सरकार ने मन ली है, अब भरष्टाचार पर नकेल कसने के लिए एक कमिटी गठित की जाएगी जिसमे चुनिन्दा लोगों की एक समिति होगी जो भ्रष्टाचार पर लगाम लगाएगी । अब देश में बढ़ता हुआ भ्रष्टाचार का ग्राफ ,घोटाले , रिश्वतखोरी ख़त्म हो जाएगी ,इसलिए मै बहुत खुश हो आज ।


वह वह फैज़ वह तू अपने आप को पत्रकार कह्ता है अरे कैसा पत्रकार है तू ज़रा दिमाग से सोच बाबा साहब की कमिटी के बाद कोई ऐसी कमिटी बनी है जिसने बिना रिश्वत के , बगैर किसी घोटाले के कम किया है यदि किया भी है तो ५ साल बाद उसके घोटाले का जिन्न बहार आया है तो इस कमिटी को हम पाक साफ कैसे कह सकते है ।


चुप हो जाओ तुम कैमरे ,ये क्या सोच रहे हो ,पर फैज़ ज़रा सोचो तो हर सिक्के के दो पहलू होते है । हाँ बात तो मेरे कैमरे की सोचने लायक है .....आप सब क्या कहते है क्या यही सत्य है या कुछ और ........