मेरा कैमरा आज अच्छे मूड में था । मेरे ऑफिस से आते ही बोला ,बताओ तुम्हे कौन सा मंत्रालय चाहिए रेल ,बिजली ,पानी ,सड़क ,रछा ,वित्त या फ़िर और कुछ .......मैंने कहा तेरा दिमाग तो नही ख़राब हो गया है । मै कोई सांसद थोड़े ही हूँ जो मुझे मंत्रालय मिलेगा ,वो बोला अरे भाई न्यूज़ नही देखते क्या । क्यों क्या हुआ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पास सांसदों की कमी है क्या ? नही यार आज दिन भर जो राजनितिक ड्रामा चला है उसे तुम देखते तो तुम भी यही कहते ,अच्छा बता क्या हुआ आज ..........
होना क्या था करूणानिधि जी का लड़का और लड़की दोनों सांसद हो गए है, अब वो ये मौका तो छोड़ने से रहे उनकी नज़र स्वास्थ्य, दूरसंचार, बिजली, भूतल परिवहन और रेलवे जैसे मंत्रालयों पर है । वहीं तृणमूल कांग्रेस की माँग है कि मंत्रिमंडल में उसके मंत्रियों की संख्या डीएमके से एक अधिक होनी चाहिए । सबसे अधिक खीचातानी तो रेल मंत्रालय के लिए मची है ,मेरे सूत्रों के अनुसार करूणानिधि अपनी बेटी को ये मंत्रालय दिलाना चाहते है ,वही अगर तृणमूल कांग्रेस की माने तो उनकी पार्टी प्रमुख मामता बनर्जी इसकी प्रबल उम्मीदवार है ।
रेल मंत्रालय पिछली बार राष्ट्रीय जनता दल के लालू प्रसाद यादव के पास था लेकिन इस बार उनकी पार्टी को केवल चार सीटें ही मिली हैं ।
ऐसी ख़बरें हैं कि कांग्रेस ने सहयोगी दलों के लिए एक फ़ॉर्मूला तय कर लिया है । इसके मुताबिक हर सात सासंद पर एक कैबिनेट और एक राज्यमंत्री का पद दिया जाएगा । इसी दबाव को देखते हुए गुरुवार सुबह कार्यवाहक प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के बीच होने वाली बैठक स्थगित कर दी गई । इस बैठक में प्रधानमंत्री राष्ट्रपति को मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले लोगों के नामों की सूची सौंपने वाले थे । मनमोहन सिंह शुक्रवार को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले हैं ।
अब तुम्ही बताओ फैज़ अगर ते लोग झगडा करेंगे एक सीट के लिए तो नई सरकार का गठन कब होगा ,तुम खाली हो इसलिए मैंने तुमसे कहा की तुम ही कुछ बन जाओ । नही यार ऐसे नही होता ये सब राजनितिक खेल है तू नही समझेगा ,जब तक ये सब नही होगा सरकार में इन घटक दलों को कोई नही पूछेगा ,इसलिए ये सब नौटंकी कर रहे है समझा तू परीशान मत हो।
आप ही बताये क्या होगा इस देश का जब तक ये सब होगा । बिना बहुमत के सरकार बनने का मौका मिले और टाइम पर आपके पास आपके मंत्रिमंडल की लिस्ट ही न हो ,जिसकी वजह से आप सरकार न बना पाए ,आप राष्ट्रपति से तय समय पर मिल न पाए, तो इसका क्या असर जाएगा जनता पर ,क्या वो आपको दुबारा चुनेगी ,आप कह रहे है की ये घटक दलों की वजह से हुआ है तो फिर कैसा है आपका संघटन ,क्या वो इतना कमज़ोर है की एक मंत्री नही चुन सकता । जल्दी कीजिये वरना क्या होगा भगवान ही जाने ,कही मेरे कैमरे की बात सत्य हो गई तो हमें चलाना पड़ेगा देश को ,और आप हमारे आगे पीछे दौडेंगे ।
