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Wednesday, October 5, 2011

"सविधान का हनन "

यार फैज़ एक कम कर अपनी गाड़ी पर एक लाल बत्ती और हूटर लगा ले ....मै तो अवाक् रह गया उसके इस बचकाना हरकत से ...अरे कैमरे भंग खाई है क्या तुने ...जनता है न लाल बत्ती कौन लगा सकता है अपनी गाड़ी पर ...अरे जनता हों पर कल बहराइच में क्या हुआ तुने देखा था न ...आप को बता दो कल मै बहराइचके दौरे पर था मेरा कैमरा हमेशा की तरह मेरे कंधे पर चढ़ा बैठा था ...तभी सामने से एक लाल बत्ती लगी गाड़ी आती हुई दिखी ....आगे लिखा था संसद प्रतिनिधि ...मेरा कैमरा लपक के आगे आ गया और लगा फोटो खीचने तभी उसमे से एक महिला बहार आई और और सभी का अभी वादन करने लगी ....मैंने आस पास के लोगों से जानकारी की तो पता चला की ये संसद जी की पत्नी है और चुनाव प्रचार पर निकली है ..........


बस तभी से इसका दिमाग ख़राब है ...और वहां के परिवहन अधिकारी बड़ी बड़ी बात कर रहे थे की यह गलत है और दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी पर ऐसा कुछ नहीं होगा ....जब माननीयों को यह सोविधा है की वो सविधान का हनन अपनी मर्ज़ी से करते रहे तो गरीब तबके और मिडिल क्लास फैमली को क्यों सविधान के दायरे में रहना पड़ता ही। क्या सिर्फ नियम कानून गरीबों के लिए ही ही ...या फिर सविधान में यह ही की कोई भी व्यक्ति लाला बत्ती लगी गाड़ी से घूम सकता ही और घूम ही नहीं चुनाव प्रचार कर सकता ही ........सोचिये और बताइए आखिर ऐसा कब तक होता रहेगा हमारा हनन ..............

Friday, August 19, 2011

धोका "अन्ना" का

क्या अन्ना जी आप चल पड़े उसी रह पर ...सरकार ने आप को २ सितम्बर तक का टाइम दिया था ...आप बहार आये और अपना भ्रष्टाचारी रूप दिखा दिया .....धोका दिया है आप ने ये कह के आम जनता को की अब हम तब तक यहाँ से नहीं उठेंगे जब तक की जन लोकपाल लागू नहीं किया जाता .....मै जन लोकपाल के खिलाफ नहीं हो मै आप के खिलाफ हूँ यह कैसा छल का सत्याग्रह या अनशन है मुझे जवाब देगा कोई ...आम जनता भले ही भारत की भेड़ चाल चलने वाली हो..पर इतिहास गवाह है यहाँ की जनता को अगर छाला गया है तो इसका परिणाम बहुत ख़राब आये है आप अंग्रेजों का हाल देख चुके है ..........गाँधी बनना चाहते है तो उनके आदर्शो को फिर से पढ़े अन्ना जी .........

Wednesday, April 27, 2011

"२६ जून की दुविधा "

बताइए न सर मै क्या करू किस की परीक्षा दू ...मै तो परेशां हो गया हो । सरकार कहती है की हर छात्र सभी प्रतियोगी परीक्षा को दे सकता है अगर वो उसके नियमो का पालन करता है तो पर ये कैसी परीक्षा प्रणाली है की एक ही दिन में ४-४ प्रतियोगी परीक्षा हो रही है । ........


ये उस छात्र की दुविधा है जिसने इस वर्ष UGC NET , SSC , CBSE TET और UPPCS की प्रतियोगी परीक्षा का आवेदन किया है अब वह क्या करे इनमे से कौन सी परीक्षा दे या छोड़े । सब एक ही दिन यानि २६ जून २०११ दिन रविवार को हो रही है । ....


भारत सरकार क्या कर रही है , क्या वो इस तरह छात्रो के भविष्य से खिलवाड़ तो नहीं कर रही । आखिर क्यों ऐसा हुआ क्या इन प्रतियोगी परीक्षाओ की समितियों मे कोई भ्रष्ट समझौता हुआ है क्या ? आखिर इस तरह छात्रो के भविष्य से क्यों खिलवाड़ हो रहा है .........


मुझे जवाब चाहिए ...??????


Saturday, April 9, 2011

"एक और भ्रष्टाचार की कमेटी "

क्या बात है फैज़ आज तुम बहुत खुश लग रहे हो कुछ खास वजह इसकी बोलो ? हाँ कैमरे आज भारतीय लोक की विजय हुई है , आन्ना हजारे जी जो की पिछले दिनों अनशन पर बैठे थे भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी मांग भारत सरकार ने मन ली है, अब भरष्टाचार पर नकेल कसने के लिए एक कमिटी गठित की जाएगी जिसमे चुनिन्दा लोगों की एक समिति होगी जो भ्रष्टाचार पर लगाम लगाएगी । अब देश में बढ़ता हुआ भ्रष्टाचार का ग्राफ ,घोटाले , रिश्वतखोरी ख़त्म हो जाएगी ,इसलिए मै बहुत खुश हो आज ।


वह वह फैज़ वह तू अपने आप को पत्रकार कह्ता है अरे कैसा पत्रकार है तू ज़रा दिमाग से सोच बाबा साहब की कमिटी के बाद कोई ऐसी कमिटी बनी है जिसने बिना रिश्वत के , बगैर किसी घोटाले के कम किया है यदि किया भी है तो ५ साल बाद उसके घोटाले का जिन्न बहार आया है तो इस कमिटी को हम पाक साफ कैसे कह सकते है ।


चुप हो जाओ तुम कैमरे ,ये क्या सोच रहे हो ,पर फैज़ ज़रा सोचो तो हर सिक्के के दो पहलू होते है । हाँ बात तो मेरे कैमरे की सोचने लायक है .....आप सब क्या कहते है क्या यही सत्य है या कुछ और ........

Thursday, March 24, 2011

कहाँ गयी गौरया

माँ माँ देखो न इस चिड़िया को क्या हुआ है .............अरे ये तो अरे ये तो गौरैया है तुझे कहाँ से मिली ? मै दालान में बैठा था तभी ये आकर आँगन में बैठी और तड़पने लगी मै इसे उठाकर आप के पास ले आया ........
मेरे और माँ के बीच अभी बाते ही चल रही थी की वो चल बसी .... शायद किसी जानवर ने उसे चोट पहुचाई थी ।
चलिए ये तो एक दुर्घटना थी ', पर हम और आप इस नन्ही सी जान का अस्तित्व मिटने पर क्यों लगे है ,आप कहेंगे की ये तो सरा सर आरोप है हमारे उपर पर यह सच है हम इस नन्ही का आशियाना उजड़ने में लगे है , जाने अनजाने हमी इसके गुनहगार है ।
जगह जगह अट्टालिकाए ,मोबाइल टावर खड़े होते जा रहे है ये पंछी कहाँ रहेगा ? दादी-नानी की कहानियों में आने वाली यह चिड़िया अब खुद कहानी बनने के कगार पर खड़ी है । आज बनारस , लखनऊ , रायबरेली , इलहाबाद हर जगह इन्हें कम होते देखा जा सकता है अब ये कभी कभी ही नजर आती है । जो लोग कभी इस की आवाज़ सुन कर अपना "बिस्तर" छोड़ा करते थे , आज वो कारखानों के सायरन से उठा करते है , शायद वो मजबूर है , या फिर कुछ और ?.....

आखिर इन सब का ज़िम्मेदार कौन है सोचिये ..............?


Sunday, March 6, 2011

आह......!!! महिला दिवस


आज विश्व महिला दिवस है इसकी पूर्व संध्या पर दिल्ली मेंजो हुआ क्या वो हमारी संस्कृति और सभ्यता को शोभादेता है हाँ पुरे देश से आए लोगों ने इस अजीबमानसिकता के खिलाफ एक प्रदर्शन किया .....वो अजीबमानसिकता क्या है...लड़कियों को गर्भ में ही मौत की नींदसुला देना उसे ममता की मूरत अपनी माँ के हाथो में आनेसे पहले ही इस दुनिया के हनथो से छीन लेना। कहा का है ये इंसाफ क्या लड़कियां किसी से कम है ,आवाज़आएगी नहीं । रविवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘ग्लोबल वॉक फॉर इंडियाज़ मिसिंग गर्ल्स’ के बैनर तले कई लोग इक्कठा हुए । इन लोगों का मक़सद था कन्या भ्रूण हत्या के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद करना । ...
जब १९९४ में भारत सरकार ने भ्रूण हत्या के ख़िलाफ़ ‘प्री नेटल डायगनॉस्टिक टेकनीक्स एक्ट’ यानि पीएनडीटी एक्ट बनाया लेकिन यह क़ानून भी सख्ती से लागू नहीं हो पाया है। यह कानून अध्याय में भारतीय कानून कीकिताब में कही गम सा हो गया लगता है एक तरफ जहाँ हर जगह पैथोलोजियों के बहार यह स्लोगन लिखा होता हैकी ..गर्भ में भ्रूण का लिंग परिछाद करना कानूनन अपराध है वही उसके बाहर "दलाल" उन वहशी माँ-बाप से सौदातय करते अक्सर दिख जाते है जिन्हें अपनी लड़की से प्यार नहीं ......

क्या ;अद्कियाँ किसी बात में लडको से कम है क्या ...मुझे तो लगता है की यह समाज अभी भी यही सोचता है
सब बेवक़ूफ़ है क्यों करते है भारत को विकसित करने की बात इन्हें तो बस ऑफिस में बैठ के मज़ा लेना है इनकीटोपी उनके सर करना है ....समाज में क्या हो रहा है इनसे क्या मतलब .........

अफ़सोस होता है मुझेचल कैमरे चल यहाँ से कही और चलते है ....
और आप सोचिये ...,........


"अन्धविश्वास का नाश्ता "

बोलो पनिहयेवा बाबा की जय .....जय ....जय .....
बच्चो आप की परीक्छा के दिन करीब है। इसलिए आज हम आप सभी को एक ऐसे मन्त्र बारे में बताएँगेजिससे कोई भी चीज़ कंटस्थ करने के बाद आप नहीं भूलंगेइस मन्त्र को जप करने से पहले ठन्डे जल से सूर्य कीऔर मुह करके स्नान करे।

आप सोच रहे होंगे मै एक तो इतने दिन बाद लौट के आया और आते ही बहकी बहकी बात करने लगा तो बताताचलू की मेरे कैमरे की तबियत ख़राब थी वो अस्पताल में था पिछले महीनो से आज ही घर लौटा हैसुबह उसनेएक प्रथिष्ठित हिंदी दैनिक समाचार पत्र पढ़ते हुए यह मुझे सुनायामज़े की बात यह थी की उसमे एक कलम थाजिसमे लिखा था तंत्र-मन्त्र और उसमे यह समाचार था

अब बताइए अगर अन्धविश्वास इस तरह नाश्ते की टेबल पर परोसा जाएगा तो क्या होगा हमारी आने वालीशोर्ट-कट" पीढ़ी पर ,और सुनिए जब मैंने उसकी ऑनलाइन समाचार पत्र सेवा का जायजा लिया तो वहा भी यहीसमाचार मिलाहम या आप उनसे पुछेंगे की ये क्या है तो वो बोलेंगे जी ये तो विज्ञापन है हम कुछ नहीं करसकते

बताइए मुझे क्या होगा आने वाले समय में जब भारत विकसित देश होने का सपना देख रहा है, तो प्रजातंत्र का येमहत्वपुर्ण स्तम्भ हमरे देश के भविष्य को तंत्र-मन्त्र और अंधविश्वास का पाठ पढ़ा रहा है

सोचिये और मुझे बताइए क्या ये सही है जो हो रहा है .........क्या होगा हमारी उस मुहीम का जिससे हम देश कोविकसित करने का सपना देख रहे है .............
"

Friday, September 24, 2010

दासमुंशी कुछ तो शर्म करो

राष्ट्रकुल खेलो में अभी तक भरी खामिया सामने आई है , दिल्ली प्रशासन अभी भी इन सब बातो पर चुप्पी साढ़े है ,चाहे वो छत से टपकता पानी हो या फिर फुट ओवर ब्रिद्ग का गिरना । क्या खेलो के ये आयोजन सफल हो पाएँगे ...कैमरामैन सुरेश कुमार के साथ प्राची दिल्ली आ....................

उफ़ यार फैज़ कैसे होगा ये आयोजन जब हर तरफ खामियां ही खामियां है । कैमरे परीशां न हो ऐसा कुछ नहीं होगा ये दास मुंशी लोगों का खेल है वो ये नहीं दिखा रहे की कितनी भव्य तैय्यारी की है हमारी सर्कार ने इन आयोजन को सफल बनाने के लिए जिसकी बानगी कल देखने को मिली जब सी जी ऍफ़ के प्रमुख माइक फेनेल ये कह कर देश का सर गर्व से ऊँचा कर दिया की यहाँ की भव्यता तो बीजिंग को भी पीछे छोड़ देगी ।

फिर भी हमारे प्यारे दासमुंशी जी वो तो बस खमियां गिन्नाने पर तुले है क्या करे भाई पचता जो नहीं कुछ भले ही देश की मित्तिपलिद क्यों न होजे उन्हें तो बस ये दिखाना है की सरकार में कीड़ा कहाँ लगा है । भाई उनकी टी आर पीत का जो सवाल है हमारे देश की जितनी भाद हुई इन ३ महीनो में क्या कभी किसी आम जन माणूस ने ये सोचा था । कितनी आसानी से भारत की इज्ज़त को फूटबाल की तरह खेला गया और वो भी किसने समाज के एक महत्वपूर्ण स्तम्भ ने किया । कहाँ गयी न्यायपालिका क्या इन्हें रोकने का उसके पास कोई कानून नहीं है और ये दासमुंशी इतने अंधे हो चुके है की उन्हें हमारे देश की मन मरियादा का ख्याल नहीं रह गया क्या वो धरती माँ की इज्ज़त इस तरह उच्छालने के अधिकारी है । ।

आखिर कब सुधरेंगे ये लोग जो छादिक लाभ के लिए देश की अस्मिता को चोट पंहुचा रहे है ...............

बताइए मे आप सब से पूछ रहा हूँ आखिर कब तक होगा ये भारत माँ को बेईज़त करने का नंगा नाच,कब तक आखिर कब तक .........

Saturday, September 4, 2010

"धरती के भगवन "



आज धरती के भगवन के लिए ख़ास दिन है हाँ आज शिछक दिवस है ,....अरे फैज़ ये क्या बड बड़ा रहा है ...धरती के भगवन ...चुप रहो तुम मै उस भगवन की बात कर रहा हो जो हमारे मार्गदर्शक होते है हाँ हमरे समाज के रचियता


आज का यह शिचक दिवस मेरे लिए ख़ास भी है मेरे पिता भी आज रिटायर हो रहे हैवो भी एक इंटर कॉलेज से ४३ साल नौकरी करके आज रिटायर हुए हैमुझे फक्र है की मै उनका पुत्र हो .......


उस भगवन ने तो सिर्फ हमें धरती पर भेज दिया लेकिन धरती से परिचित करना , उस भगवन का परिचय करने के लिए एक और भगवन को धरती पर भेजा जिस को बार बार अवतार लेने की ज़रुरत नहीं है , ये भगवन एक मामूली इन्सान के अन्दर छुपे होते है , ये बिना ,किसी चढ़ावे के सबकी मनोकामना पूरी करते है कुछ भी जो उनके अधिकार में निहित है आज का दिन भारत के राष्ट्रपति डाक्टर सर्वपल्ली राधाक्रिश्न्णन का जन्मदिन भी जिन्होंने अपने इस जन्म दिवस को इस भगवन के नाम निहित कर दिया ...... वो आखरी शिचक दिवस जिसमे मै नहीं पहुच पाया मुझे ....हमेशा याद रहेगा । हाँ सितम्बर २००८ को मै दिल्ली में था नहीं पहुँच पाया अपने ग्रुजनो के बीच आज उन सब की बाते याद आती है . फैज़ ऐसे करो ये करो ,ये अच्छा किया ये ऐसे करते तो और अच्छा होता ...........अब मै आगे नहीं लिख पाऊँगा मेरी पलक भीग रही है .......


आज मै अपने कैमरे और सरे ब्लॉग परिवार की तरफ से धरती के भगवन को इस धरती को सुचारो रूप से चलाने की बधाई देता हूँ साथ ही उनको नमन करता हो ........

Saturday, August 21, 2010

"चिकना घड़ा"

अरे कैमरे तो इतना दुखी क्यों है आखिर क्या हुआ ....तुझे साप ने कटा है क्या । नहीं भाई फैज़ मुझे तो हमरे देश के समझदार मलाईदार नेतूने कटा है आज मैटीवी पर उनकी नौटंकी देखकर दांग रह गया है जिस देश में गरीब को दो वक्त की रोटियां भी बमुश्किल नसीब होती हैं वहां पर उन्हीं गरीबों के नुमाइंदों ने सैलरी में 200 पर्सेंट की वृद्धि होने के बावजूद संसद में शुक्रवार को जमकर हंगामा मचाया। सासदों के आचरण को देखते हुए सदन की कार्यवाही तक ठप करनी पड़ी। मौखिक रूप से सांसदों ने अलग से संसद का गठन किया। स्पीकर की भूमिका में बीजेपी के गोपीनाथ मुंडे दिखे तो लालू प्रसाद यादव कुछ ही पलों के लिए स्वघोषित प्रधानमंत्री बने नजर आए। अब सवाल यह पैदा होता है कि क्या सचमुच नेताओं की सैलरी बढ़ाने की जरूरत है। आइए जरा नजर डालते हैं नेताओं की बढ़ी हुई सैलरी और उनको मिलने वाली सुविधाओं पर :-
बेसिक पे पहले
16 हजार रुपये
बेसिक पे अब
50 हजार रुपये
संसदीय क्षेत्र भत्ता पहले
20 हजार रुपये
संसदीय क्षेत्र भत्ता अब
40 हजार रुपये
गाड़ियों के लिए रोड माइलेज रेट पहले
13 रुपये / किलोमीटर
गाड़ियों के लिए रोड माइलेज रेट अब
16 रुपये / किलोमीटर
पेंशन पहले
8 हजार रु. महीना
पेंशन अब
20 हजार रु. महीना
इतना ही नहीं सांसदों को सलाना डेढ़ लाख फ्री फोन कॉल्स करने की सुविधा है जिसके लिए उन्हें तीन लैंडलाइन और दो मोबाइल फोन मिले हैं। सांसदों के लिए एक साल में 34 हवाई यात्राएं भी मुफ्त हैं जिसकी कीमत पांच लाख रुपये के आसपास है। सांसदों के पति या पत्नी लिए भी सुविधाओं की कमी नहीं है। सांसदों की पत्नी या पति के लिए असीमित प्रथम श्रेणी की रेल यात्रा भी फ्री है। साथ ही, फ्री आवास सुविधा, फ्री फर्नीचर जिसके लिए सरकार 60 हजार रुपये प्रति महीना किराया पे करती है। अतिरिक्त सामान के लिए 15 हजार रुपये प्रति महीना किराया पे किया जाता है। इतना ही नहीं सांसदों के सोफा कवर्स, पर्दे, बाथरुम की सफाई भी मुफ्त ही होती है। सांसदों के लिए एक साल में पचास हजार यूनिट बिजली जलाने की सुविधा और चार हजार किलोलीटर मुफ्त पानी भी है। कुल मिलाकर हमारे सांसदों को 37 लाख रुपये सलाना मिलते हैं। क्या इन्हें और की जरूरत है ? (नवभारत
टेम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार)

अब तो ही बता देश की जनता भूकी नहीं मारेगी तो क्या होगा देश का किसान आत्महत्या नहीं करेगा तो क्या करेगा । जिस सरकार के पास ओचित भाव से किसानो का अनाज खरीदने के लिए धन नहीं है वो इन जनता के इन नुमैन्दो ,जो की जनता की आवाज़ उठाने के लिए उस पवित्र घर में मौजूद है , को कहाँ से इतना पैसा देगी ..और ये मूह फाड़ फाड़ कर जनता के हित की बात करने वाले नेताओं को उस वक़्त क्या हुआ था सब के सब एक सुर में राग अआलाप रहे थे की हमें और पैसा चाहिए शर्म आती है मुझे ये सब कहते हुए.........

हाँ बड़ी विडम्बना है ये देश की चल तुने तो सोचा पर बाकि सब नै सोचते चल उठ जा कम पर चलते है और आप भी जाइये वरना बॉस की दन्त .बीवी की मार , बेवजह की परेशानी ,क्या फायदा ये सब झेलना पड़ेगा ......