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Wednesday, June 24, 2009

"बोरवेल अंकल का साछात्कार"

कल एक और बच्ची "बोरवेल अंकल" के मुँह में जा गिरी । फ़िर क्या था हाँथ पाँव फूल गए प्रशासन के सभी भाग दौड़ करने लगे । एक बार फ़िर खबरिया चैनलों को २४ घंटे दर्शकों को बांधने का मौका मिल गया। मेरा कैमरा भी निकल गया इस घटना क्रम को करीब से देखने ,और जब वो लौटा तो उसके पास ऐसा कुछ था जो शायद ही किसी मीडिया के रिपोर्टर के पास हो । वो था उस बोरवेल और उसमे गिरे तमाम लोगों का साछात्कर ............जिसे मै आज यहाँ पेश कर रहा हूँ । आशा है आप को पसंद आएगा.........



पहला प्रश्न बोरवेल अंकल आप से .....ये बताइए की आप का जन्म कैसे होता है ? उत्तर -अजी होना कैसे है बस सरकार से ठेका होता है और ठेकेदार लोग हमें बड़ी बड़ी मशीनों के द्वारा खुदवाते है । जिससे उस जगह पर पानी की कमी पुरी की जा सके । बस इस तरह हमारा जनम होता है ।



प्रश्न-२- ये बताइए आप की प्रविती खुले रहने की हमेशा खुले रहने की है या बस युही मज़ा लेने के लिए ? उत्तर - देखिये मेरा मुँह न खोल्वाइये । हम कोई शौक नही रोज़-रोज़ बच्चों को गोद लेने का जो मुँह खोल के बैठे रहे की प्रिंस आए ,ज्योति आए या फ़िर अंजू । वो तो ठेकेदारों और सरकार की मिली भगत होती है ।जितने पैसे सरकार बोरवेल खुदवाने के देती है उतने ही उसे पाटने के भी ,लकिन ये लोग पैसे खा जाते है । जब कोई हमारे अन्दर गिर जाता है तो फिर सरकार उसे पाटने का आदेश देती है फिर से टेंडर होता है फिर से पैसे की दलाली होती है ।



आइये अब बात करते है भारत के बोरवेल में गिरे सबसे पहले बच्चे प्रिन्स की जिसे देश ही नही पूरी दुनिया ने ५४ घंटे तक लगातार देखा । उस दिन तारीख थी , वो मार्च की २१ तारीख थी जब एक तरफ़ मिलेट्री उसे बहार निकलने के लिए जी - जान लगाये थी वही भारत का एक अमूल्य संगीत रत्न गहरी नीद में सो चुका था जी हाँ भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्ला खा .......जिन्हें ३९ जी.टी.सी। गोरखा रेजिमेंट के जवानों ने राष्ट्रिय सम्मान के साथ सुपुर्दे खाक किया ।



प्रश्न-३-तो प्रिन्स जी ये बताइए उस दिन क्या हुआ था जब आप बोरवेल में गिरे थे ?
उत्तर- मै तब बहुत छोटा था मुझे कुछ याद नही लकिन बाबा बताते है की मै खेलता खेलता वहां पहुच था और फ़िर जो हुआ उसे पुरी दुनिया ने देखा । क्या हुआ कैसे बचा और बाकी सब । हाँ मै ये कह सकता हूँ की मेरे गिरने के बाद बोरवेल में गिरने का ट्रेड सा आगया है ।


प्रश्न-४-अगला प्रश्न अंजू जी आप से ये बताइए कैसा लग रहा है आप को बोरवेल की घटना के बाद ?


उत्तर - जी सब भगवान की मर्ज़ी है ,वरना मै तो अपने आप को मारा समझी । बोरवेल अंकल ने मुझे तो फसा दिया था ....मै कुछ समझा नही ...सब न्यूज़ वाले यही कह कह कर सब बात उगलवा लेते है । क्या आप लोग बिना समझ के यहाँ तक पहुचते है । .........बात ये हुई की मै सुबह में खेल रही थी की मुझे बोरवेल अंकल की आवाज़ सुनाई दी ,मै वहां गई तो वो बोले की मुझे तो कोई आज कल पूछ नहीं रहा ऐसा है तो शाम में मेरे पास आकर खेलना और इसमे गिर जाना तुझे मै ज़्यादा अन्दर नही जाने दूँगा । तू मरे गी नही....मै भी मशहूर हो जाऊँगा और तुम भी .........

देखिये अंजू जी मेरे ऊपर आप इल्जाम लगा रही है , आप ही ने तो पैसा पाने के लिए ये सब किया था । आपके पिताजी ने मुझे मुँह ना खोलने के लिए कहा है वरना ....दिखिये बोरवेल अंकल आप मेरे पिताजी पर झूठा आरोप लगा रहे है । मेरे पिताजी तो बहुत गरीब है , आप झूट बोल रही है ...नही आप झूट बोल रहे है .........

यही ख़त्म होता है ये अनोखा साछात्कार हमें अपनी राय अवश्य भेजे ............


8 comments:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

बहुत सुंदर व्यंग्य!
पर ये टिप्पणी पर से वर्ड वेरीफिकेशन का टिप्पणी-बैरी तो हटाइए।

mahashakti said...

हा हा हा

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

सचमुच बहुत सुन्दर व्यंग्य रचना......

डॉ. मनोज मिश्र said...

vakai bhut mzedaar hai yh sakshaatkaar .

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

:)

Harkirat Haqeer said...

बहुत खूब .....!!

अच्छी टांग खिची है बोरवेल अंकल की.. ....!!

महामंत्री - तस्लीम said...

शानदार साक्षात्‍कार। आपकी सोच को नमस्‍कार।

-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

Babli said...

वाह वाह बहुत बढ़िया और मज़ेदार भी!